श्रीखण्ड_महादेव_यात्रा
पंच कैलाश मे से तृतीय कैलाश श्रीखण्ड महादेव हैं. दुनिया की सभी धार्मिक यात्राओं में यह यात्रा सबसे कठिन मानी जाती है.
श्रीखण्ड महादेव हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित हैं, इनका बेस कैंप जांव गाँव है.
यह यात्रा आधिकारिक रूप से हर वर्ष 15 जुलाई के आसपास से शुरू हो कर, 30 जुलाई तक चलती है. यात्रा केके समय आपको सरकार की ओर से विभिन्न जगहों पर यात्री सहायता केन्द्र स्थापित रहते हैं जहाँ मेडिकल या अन्य आपात स्थिति में आपको सहयोग मिल सकता है, कुछ जगह पर भण्डारा भी लगे रहते हैं.
अब आते हैं यात्रा के मार्ग पर:-
सबसे पहले आपको रामपुर सराहन पहुचना होता है, जो शिमला से करीब 125 किलोमीटर दूर है, शिमला से बस मिलती हैं या आप टैक्सी बुक करके भी आ सकते हैं, वैसे जांव के लिए रास्ता, शिमला- रामपुर बुशहर के करीब 6 किलोमीटर पहले से ही अलग हो जाता है, यदि आपको जानकारी नहीं है तो आप रामपुर बुशहर ही चले जाइये, रामपुर बुशहर से समय समय पर जांव गाँव के लिए बस चलती हैं. जो निरमंड, बागीपुल, होते हुए जांव तक सड़क मार्ग है. यहाँ आप वाहन से पहुँच सकते हैं, उसके आगे की यात्रा अपने दम पर होगी.
जांव आराम करने के बाद, एकदम सुबह यात्रा शुरू कर सकते हैं. जांव से सिंहगाड़ 3 किलोमीटर है, सिंहगाड़ में आपका रजिस्ट्रेशन और मेडिकल होगा, जिसके लिए करीब 100 रूपये शुल्क है. यह दोनों काम बहुत आराम से हो जाता है. इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है.
रजिस्ट्रेशन और मेडिकल के बाद, आप यहाँ से चल पडते हैं थाचडू के लिए, थाचडू तक एकदम सीधी खड़ी चढाई है, थाचडू लगभग 3550 मीटर की ऊंचाई पर है, यहाँ पंहुच कर रात्रि विश्राम कीजिये, सुबह फिर चल पडते हैं और चढते उतरते आप पहुँच जायेंगे भीमद्वार, यहाँ आप रात्रि विश्राम करिये और सुबह 3-4 बजे के बीच श्रीखण्ड महादेव के लिए चल पडिये, यह सबसे कठिन भाग है, आप सीधे आसमान में पहुचते रहते हैं, मौसम के साथ चलते रहिये, यदि मौसम खराब हो तो यात्रा न करिये,
सुबह 11-12 बजे के बाद शिला से जरूर वापस चल पडिये, फिर आप रात्रि विश्राम भीमद्वार में करिये, अगले दिन थाचडू, आइये और फिर विश्राम करिये, तथा अगले दिन वापस जांव आइये.
इस यात्रा में यात्रा सीजन में आपको जगह जगह खाने पीने और रहने की व्यवस्था मिलेगी, इसलिए टेंट और स्लीपिंग बैग ढोने की आवश्यकता नहीं है.
यह कठिन यात्रा है, यदि आप चल सकते हैं और ऊचाई से कोई दिक्कत नहीं है, तभी यह यात्रा करिये, क्योंकि इस यात्रा में सबसे ज्यादा खतरा रहता है. अकेले तो न ही करिये, हलांकि यात्रा मार्ग के चिह्न बने हुए हैं तीर निशान, लेकिन फिर भी आप भटक सकते हैं,
यदि आप चलने और ऊचाई तक जा सकते हैं तो आपको किसी भी ट्रेवलिंग एजेंसी की आवश्यकता नहीं है, हर जगह रहने खाने की सुविधा और मार्ग के चिह्न हैं, यदि ज्यादा दिक्कत हो तो जांव पहुचकर, वहीं से एक गाइड ले लीजिए, बाकी अन्य किसी भी चीज़ की आवश्यकता नहीं है.
और अंत में एक गर्म जैकेट, इनर, रेनकोट और बढिया ट्रेकिंग शूज, ट्रेकिंग पोल जरूर साथ रखिये, क्योंकि रात में तापमान बहुत कम हो जाता है, ठण्ड बहुत रहती है.
यह यात्रा शारीरिक से ज्यादा मानसिक है. यदि आप तन और मन से स्वस्थ हैं तभी कीजिये, मौसम साफ रहे तभी यात्रा करियेगा. जान रहेगी तो फिर जा सकते हैं, अपने शरीर के साथ जबरजस्ती बिलकुल न करियेगा, क्योंकि इस यात्रा पर आप को कोई भी सुविधा (घोड़े खच्चर पालकी) नही मिलेगा, सिर्फ अपने दम पर ही यह यात्रा कर सकते हैं. बाकी महादेव पर छोड़ दीजिये, वही आपको सकुशल यात्रा संपन्न करवायेगें.
बाकी इमेज में दूरियाँ और ऊचाई अंकित है, किसी भी अन्य सहायता के लिए मै प्रस्तुत हूँ🙏
हरहर महादेव🙏
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